आज कुछ लिखने का मन कर रहा है ...
पर क्या कहना चाहता है ये मन ...
मुझे नही पता
दिल की गहराईयों में बंधा हुआ ...
अपने अफसाने को शब्द देने में असक्षम महसूस करता हुआ ...
टूटता हुआ... अपने इरादों में बिखरता हुआ॥
अपने सोच के क्षितिज को खोज रहा ...
अपने क्षमताऑ के सीमाओं को ढूँढ रहा...
तलाशता हुआ स्वंय को दुनिया के कारवा में ...
उड़ता हुआ मैं अपने कल्पना के आसमा में ||
मेरे निशान ...
मेरे चिन्ह ....
मेरी दुनिया ...
मेरा अस्तित्व ...
मेरी अस्मिता...
सब एक प्रश्न चिन्ह ...
मैं निरुत्तर ढूँढ रहा
अपने जवाब... अपने आसमा को...
Wednesday, June 24, 2009
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