शांति! शांति! शांति!!
हमे चाहिए सिर्फ थोडी सी शाँति !
पर है कुछ नादान लोगों को ये भ्रान्ति ,
जिसे कहते है वो अपनी क्रांति ,
वो क्रांति जो इंसानियत के दायरों को है लांघती
वो क्रांति जो मानव जीवन के मूल्य को नहीं पहचानती
Iवो क्रांति जो किसी इश्वर, अल्लाह या इसा को नहीं मानती
Iवो क्रांति, जो केवल भय द्वेष और आतंक को है जानती
Iवो क्रांति जो है एक खूनी क्रांति
Iवो क्रांति जो है एक खूनी क्रांति॥
न अब मन स्वतंत्र है, न है कोई चित शाँत ,
न अपने घरों में महफूज़ हम,न ही है प्यार सदाचार सहयोग की कोई मंद शीतल हवा
Iआग से जल रहा संसार है,द्वेष के धुऐं से ढका सारा संसार है,
नहीं दिख रही आशा की कोई ज्योति, इतना घोर अंधकार है
Iबच्चों के हाथों में किताबों के स्थान पर अब हथियार है,
गेहूं, चावल के स्थान पर अपने जनीम में बोए हमने बम और हथियार है
IIजंग में जीत चाहे किसी की भी हो,
हारता तो इन्सान है
Iआतंक का रूप चाहे जो भी हो,
हारता केवल भगवान है
Iअरे नादानों, लड़ते हो इश्वर, अल्लाह के लिए,
क्या कभी सोचा है कुछ?
अगर मिले कभी खुदा से तो
उसे क्या जवाब दोगे तुम?
हे खुदा ! लाशों की ढेर के ऊपर बने स्वर्ण प्रासादों में क्या रहोगे तुम?
अपने इन नादान पुत्रों के रक्त सने हाथों को कैसे धोओगे तुम !
क्रिया-प्रक्रिया, मन-अपमान, युद्ध और जंग से परे हट
'जियो और जीने दो' की उक्ति को चरितार्थ करो ;
अपने परिवार, अपने समाज, अपने देश, अपने जहा का
अपने सुकर्मों से उद्धार करो,
अपने मानव जीवन का उद्धार करो !!