Wednesday, May 13, 2009

यादें ...

ज़िंदगी, रुक जा , ज़रा तो ठहर ।

मुड़ कर तो देख,

जो बीत गया पहर ।

चल-चला है तू जिस डगर ,

अंजाम का किया न तुने जो फिकर ...

ये ज़िंदगी का सफर,

क्या पाया तूने, क्या खोया ....

इसका हिसाब तू कर इस कदर-

की जो बचा है उसे उमंग-रुपेण मन में भर,

की ये कदम, जो चले है नभ को छूने उसके घर,

ये बाज़ूएं जिन्हें सहना है जीवन का हर कहर,

और होना है सफल ,

बढ़ते रहे ! यादें बोझ न बनें !

ना बन अवरोध यादें बने हमारा बल !

यादें बनकर दीपक करे जीवन पथ रौशन !

यादें बनकर उम्मीद रहे मन में हर दम !

यादें हममें रहे जब तक रहे हम !!

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