Wednesday, May 13, 2009

जीवन एक सपना

जीवन तो एक सपना है,

इस सपने में भी कई सपने हैं ,

क्या हुआ जो एक सपना टूट गया ?

एक साथी जो कोई छूट गया ,

दिल मेरा तू क्यूँ रूठ गया ?

~~~

जो सपना था वो छुट गया,

जो अपने थे वो शेष हैं,

कई अपने अभी शेष हैं,

कई सपने अभी शेष हैं ।

~~~

जीवन भाग्य-परिस्थिति-सामर्थ का एक खेल है ,

जीवन सपनों की एक रेल है...

सपना पानी का बूलबूला ...कोई रहा कोई फूट गया ,

मेरा दिल तू क्यूँ रूठ गया ?

~~~

जीवन लगता तो एक मेला है ,

पर हर जन यहाँ अकेला है ,

साथी तो क्षण के साथी हैं ,

वो क्षण है अब बीत गया

दिल मेरा तू क्यूँ रूठ गया ?

~~~

ढाढस नही, तू शक्ति बाँध !

जीवन केवल अपने नही , अपनों के सपनों का है नाम ,

इन्हीं की पूर्ति हेतु कर्मरत रह -यही है तेरा निर्दिष्ट काम !!

जो छुट गया , सो छुट गया

जो शेष है वही श्रेष्ठ है ।

उन सपनों को तू अब भूल जा,

अश्रू की गंगा में तू उन्हें बहा ,

वो सपने जो हो न सके तेरे अपने ।

वो सपने जो शायद कभी न थे तेरे अपने ।।j

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