जीवन तो एक सपना है,
इस सपने में भी कई सपने हैं ,
क्या हुआ जो एक सपना टूट गया ?
एक साथी जो कोई छूट गया ,
दिल मेरा तू क्यूँ रूठ गया ?
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जो सपना था वो छुट गया,
जो अपने थे वो शेष हैं,
कई अपने अभी शेष हैं,
कई सपने अभी शेष हैं ।
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जीवन भाग्य-परिस्थिति-सामर्थ का एक खेल है ,
जीवन सपनों की एक रेल है...
सपना पानी का बूलबूला ...कोई रहा कोई फूट गया ,
मेरा दिल तू क्यूँ रूठ गया ?
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जीवन लगता तो एक मेला है ,
पर हर जन यहाँ अकेला है ,
साथी तो क्षण के साथी हैं ,
वो क्षण है अब बीत गया
दिल मेरा तू क्यूँ रूठ गया ?
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ढाढस नही, तू शक्ति बाँध !
जीवन केवल अपने नही , अपनों के सपनों का है नाम ,
इन्हीं की पूर्ति हेतु कर्मरत रह -यही है तेरा निर्दिष्ट काम !!
जो छुट गया , सो छुट गया
जो शेष है वही श्रेष्ठ है ।
उन सपनों को तू अब भूल जा,
अश्रू की गंगा में तू उन्हें बहा ,
वो सपने जो हो न सके तेरे अपने ।
वो सपने जो शायद कभी न थे तेरे अपने ।।j

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